तुम मेरी परछाई नहीं हो, लेकिन मुझे अंधेरे में छोड़कर जाने की आदत है तुम्हें ।
जब परछाई हो ही नहीं, तब यह उम्मीद ही कैसे करते हो कि उजाले में मेरा हमसफ़र बनने का मौका मैं दे दूंगी तुम्हें!

